टी एम ऑडिटोरियम में संगीतज्ञ उस्ताद रफीक सागर की स्मृति में संगीत सभा हुयी


- वैष्णव जन तो तेने कहिए पीर पराई जाने रे
बीकानेर 24 मार्च । संगीत कला केंद्र संस्थान द्वारा टी एम ऑडिटोरियम गंगाशहर में प्रख्यात गजल – भजन गायक उस्ताद रफीक सागर की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वरिष्ठ लेखक अशफ़ाक कादरी ने कहा कि उस्ताद रफीक सागर बहुआयामी संगीतज्ञ ओर लोकप्रिय कलाकार थे। जिन्होंने पांच दशकों तक संगीत साधना कर बीकानेर से कोलकाता मुंबई तक धूम मचाई। कादरी ने कहा कि स्व सागर ने साहित्यिक रचनाओं को संगीतबद्ध कर नया आयाम दिया। स्व सागर ने हमेशा नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ाया । कादरी ने कहा कि उस्ताद रफीक सागर को उनकी भक्ती रचनाओं, फिल्मों के लिए हमेशा स्मरण किया जाएगा।



कार्यक्रम में वनस्थली विद्यापीठ के प्रोफेसर डॉ. सुजीत देवघरिया ने वायलिन पर राग भूप में मध्य रचना प्रस्तुत कर अपनी स्वरांजलि दी । प्रो देवघरिया ने भजन वैष्णव जन तो तेने कहिए पीर पराई जाने रे तथा श्री रामचंद्र कृपालु भज मन प्रस्तुत कर भाव विभोर किया ।


कार्यक्रम में भगवती गोस्वामी, मनोहरी स्वामी, लक्ष्मी और सुनीता ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की । संगीत कला केंद्र के प्राचार्य पुखराज शर्मा ने उस्ताद रफीक सागर द्वारा रचित गजल, मेरे लिए जो सोच है वैसा नहीं हूं मैं अच्छा नहीं हूं माना बुरा भी नहीं हूं ” प्रस्तुत कर भाव विभोर कर दिया। तबला संगत उस्ताद गुलाम हुसैन ने की।
कार्यक्रम में कमल श्रीमाली, मोहमद ज़फ़र , चन्द्रशेखर सांवरिया, गौरी शंकर सोनी ने स्व रफीक सागर के व्यकित्व कृतित्व पर तथा संगीत योगदान पर विनम्र श्रद्धांजलि दी ।