बीकानेर के 6 सरकारी समाचार


- सामूहिक डिग्गी योजना के किसानों को मिले सस्ती बिजली, निर्बाध हो आपूर्ति – अंशुमान सिंह भाटी
- विधायक ने ऊर्जा मंत्री से किया आग्रह, टैरिफ कोड 9400 के स्थान पर 4100 लागू किया जाए
बीकानेर, 3 अप्रैल। कोलायत विधायक श्री अंशुमान सिंह भाटी ने ऊर्जा मंत्री श्री हीरालाल नागर से सामूहिक डिग्गी योजना के किसानों को महंगी बिजली से राहत दिलाने के लिए टैरिफ कोड 9400 के स्थान पर 4100 लागू करने का आग्रह किया है। गौरतलब है कि गत दिनों विधानसभा सत्र के दौरान विधायक भाटी ने कोलायत विधानसभा क्षेत्र के किसानों को इंदिरा गांधी नहर परियोजना की लिफ्ट परियोजना के तहत संचालित सामूहिक डिग्गी योजना में अधिक बिजली दरों का सामना करने का मुद्दा उठाया था।



उन्होंने बताया कि वर्तमान में इस योजना के तहत टैरिफ कोड 9400 लागू किया गया है, जिससे किसानों को 2.75 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली बिल चुकाना पड़ रहा है। इसके कारण 30 एचपी कनेक्शन का दो माह का बिल लगभग 18 हजार रुपए तक पहुंच रहा है। वहीं यदि इसे सामान्य कृषि टैरिफ (टैरिफ कोड 4100-90 पैसे प्रति यूनिट) के अंतर्गत लाया जाए, तो यही बिल केवल 6 हजार रुपए होगा। विधायक श्री भाटी ने कहा इस बड़े अंतर के कारण किसानों को प्रति वर्ष लगभग 72 हजार रुपए तक का अतिरिक्त भार वहन करना पड़ रहा है। उन्होंने राज्य सरकार की मंशा के अनुसार निर्बाध विद्युत आपूर्ति की मांग भी की है और कहा कि इससे हजारों किसानों को राहत मिलेगी।


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खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री शुक्रवार को धीरेरा में करेंगे जनसुनवाई
बीकानेर, 3 अप्रैल। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री सुमित गोदारा शुक्रवार को लूणकरणसर विधानसभा क्षेत्र की धीरेरा ग्राम पंचायत में प्रातः 10 से सायं 6 बजे तक जनसुनवाई कर आमजन के अभाव अभियोग सुनेंगे। अतिरिक्त जिला कलेक्टर (नगर) रमेश देव ने जनसुनवाई में सभी उपखंड स्तरीय अधिकारियों को उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
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विश्वविद्यालय में स्थाई राजस्थानी विभाग खोलने और पाठ्यक्रम में एनईपी के प्रावधान अनुसार अधिक से अधिक स्थानीय लेखकों को शामिल करने का होगा प्रयास: कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित
एमजीएसयू के राजस्थानी विभाग और मुक्ति संस्था के संयुक्त तत्वावधान में कवि कथाकार राजेन्द्र जोशी की दो पुस्तकों का हुआ विमोचन
बीकानेर, 3 अप्रैल। महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के राजस्थानी विभाग और मुक्ति संस्था के तत्वावधान में कवि कथाकार राजेन्द्र जोशी द्वारा नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली के माध्यम से अनुदित दो पुस्तकों ‘ दरखत काई है’ और ‘ क्यूं’ का विमोचन गुरुवार को विश्वविद्यालय सभागार में किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित थे। उन्होंने कहा कि साहित्य सृजन के क्षेत्र में राजस्थानी बेहद समृद्ध भाषा है। इस अन्य क्षेत्रों में बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों के अनुसार पाठ्यक्रमों में मातृ भाषा की आवश्यक भागीदारी सुनिश्चित करने तथा विश्वविद्यालय में स्थाई राजस्थानी विभाग खोलने के प्रयास विश्वविद्यालय द्वारा किए जाएंगे। उन्होंने मातृ भाषा को किसी भी क्षेत्र की थाती बताया और कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को इस पर गर्व की अनुभूति और सम्मान का भाव होना चाहिए। उन्होंने बीकानेर की साहित्य परम्परा के बारे में बताया और युवाओं से इस क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया।
जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक हरिशंकर आचार्य ने कहा कि किसी भी कृति का अनुवाद करना बेहद चुनौती पूर्ण कार्य होता है। इसमें मूल रचना के शिल्प सौंदर्य को बरकरार रखने के साथ इसे अनुदित भाषा में पठनीय बनाए रखने की जरूरत होती है। राजेन्द्र जोशी ने नेशनल बुक ट्रस्ट और मूल पुस्तकों की विषय वस्तु के बारे में बताया और बताया कि बच्चों के लिए अनुवाद करना उन्हें सबसे ज्यादा सुकून देता है। उन्होंने पूर्व में एनबीटी (नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली ) द्वारा प्रकाशित उनकी पुस्तकों के बारे में बताया।
इससे पहले अतिथियों ने दोनों पुस्तकों का विमोचन किया। विश्वविद्यालय की राजस्थानी भाषा की विभागध्यक्ष प्रो. संतोष शेखावत ने स्वागत उद्बोधन देते हुए राजस्थानी विभाग की विभिन्न गतिविधियों के बारे में बताया। गीतकार राजाराम स्वर्णकार ने आभार जताया। कार्यक्रम का संचालन व्याख्याता डाॅ. गौरी शंकर प्रजापत ने किया।
चित्रकार योगेंद्र पुरोहित ने कुलपति और राजेन्द्र जोशी को उनके द्वारा बनाया गया पेंसिल स्केच भेंट किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के अतिरिक्त कुलसचिव डॉ. बिट्ठल बिस्सा, डॉ. अजय जोशी, जागती जोत के सम्पादक डॉ. नमामी शंकर आचार्य, डॉ. मनोज आचार्य , रामावतार उपाध्याय, दीपक चौधरी, विपिन विश्नोई, शुभकरण उपाध्याय, पपूसिंह भाटी, चतर नाथ सिद्ध, प्रियंका रघुवंशी, यशोवर्धनी पुरोहित, सपना कुमारी सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
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खाद्य सुरक्षा योजनान्तर्गत मई माह का गेहूं आवंटित
बीकानेर, 3 अप्रैल। खाद्य सुरक्षा योजना के तहत मई माह के लिए जिले को 66 हजार 637.75 क्विंटल गेहूं का आंवटन किया गया है।
जिला कलक्टर श्रीमती नम्रता वृष्णि ने भारतीय खाद्य निगम बीकानेर से गेहूं का सम्पूर्ण उठाव अप्रैल माह में सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए हैं। गेहूं का वितरण अन्त्योदय, बीपीएल, स्टेट बीपीएल, पीएचएच श्रेणी के राशनकार्डधारियों को निःशुल्क किया जाएगा। योजनान्तर्गत अन्त्योदय परिवारों को 35 किग्रा गेहूं प्रति राशन कार्ड तथा बीपीएल, स्टेट बीपीएल, पीएचएच अन्य श्रेणी के राशन कार्डधारियों को 5 किग्रा प्रति व्यक्ति निःशुल्क वितरित किया जाएगा।
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फसल कटाई प्रयोगों द्वारा होगा रबी फसल उत्पादन अनुमान का आंकलन
अब तक आयोजित हुए 4 हजार 573 फसल कटाई प्रयोग, होंगे कुल 6 हजार 980 प्रयोग
बीकानेर, 3 अप्रैल। वर्तमान में जिले में रबी फसलों की कटाई हो रही है एवं फसलों के उत्पादन का अनुमान लगाने के लिए सीसीई ऐप के माध्यम से राजस्व फसल कटाई प्रयोग किए जा रहे हैं। जिले में रबी फसलों में सरसों, चना, गेहूं, तारामीरा, जौ, इसबगोल, मेथी व जीरा फसल के कुल 6 हजार 980 फसल कटाई प्रयोग सीसीई ऐप के माध्यम से आयोजित किये जाने है। इनमें गेहूं, सरसों व चना फसल के लिए सर्वाधिक 1 हजार 392–1 हजार 392 फसल कटाई प्रयोग आयोजित होने हैं। जिले में अब तक 4 हजार 573 फसल कटाई प्रयोग संपादित किया जा चुके हैं। इसी क्रम में कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक कैलाश चौधरी ने गुरुवार को पटवार मंडल रोंझा में फसल कटाई प्रयोग का निरीक्षण किया। चौधरी ने बताया कि फसल कटाई प्रयोग आयोजन का मुख्य उद्देश्य फसलों के उत्पादकता का अनुमान लगाना है। सभी फसल कटाई प्रयोग भारत सरकार द्वारा बनाए गए सीसीई ऐप के माध्यम से ऑनलाइन संपादित किये जा रहे हैं। फसल कटाई प्रयोग राजस्व एवं कृषि विभाग द्वारा संयुक्त रूप से जिला प्रशासन एवं आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की देख रेख में संपादित किया जा रहे हैं। फसल कटाई प्रयोग के निरीक्षण के दौरान सहायक निदेशक सांख्यिकी डॉ. मानाराम जाखड़ ने खसरा चयन प्रक्रिया, प्लॉट चयन प्रक्रिया एवं फसल कटाई विधि पर विस्तृत चर्चा एवं निर्देशित किया कि सभी फसल कटाई प्रयोग रिवेन्यू बोर्ड द्वारा निर्धारित मापदंड अनुसार ऑनलाइन सीसीई ऐप के माध्यम से संपादित किया जाना सुनिश्चित करें।
फसल कटाई प्रयोग के निरीक्षण के दौरान सांख्यिकी अधिकारी श्याम सुन्दर अग्रवाल, सहायक कृषि अधिकारी विनोद, कृषि पर्यवेक्षक शिवदत्त, बालूराम बीमा कंपनी प्रतिनिधि दीपक सहित बीमा कंपनी प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।
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संरक्षित खेती-पाॅलीहाउस व शेडनेट हाउस से लगभग चालीस लाख की आमदनी
युवा कृषक चतुर्भुज बना कृषि उद्यमी
बीकानेर , 3 अप्रैल। मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश के किसानों को आर्थिक रूप से संबल प्रदान करने की दृष्टि से विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य कृषि बुनियादी ढांचे के निर्माण के माध्यम से व्यवसाय को बढ़ावा देना और किसानों के प्रयासों को प्रोत्साहित करना है।
इसी श्रृंखला में बीकानेर जिले के लाभार्थी चतुर्भुज ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजनान्तर्गत 70 प्रतिशत अनुदान की मदद से पॉलीहाउस के जरिए खीरे की खेती कर, 40 लाखों की आमदनी की है। प्रगतिशील एवं युवा किसान चतुर्भुज आधुनिक तकनीक से व्यावसायिक खेती कर सालाना 40 लाख की कमाई कर रहा है। उन्होंने बताया कि 2017 तक वे परंपरागत खेती ही कर रहे थे, लेकिन इस दौरान आत्मा योजनान्तर्गत भ्रमण कार्यक्रम के दौरान अन्य राज्यों में हो रही उद्यानिकी तकनीक को जाना और उसे अपनाने का निर्णय लिया। चतुर्भुज ने उद्यान विभाग अधिकारियों के साथ संपर्क कर, अनुदान राशि से खेत की दो एकड़ जमीन में दो पॉलीहाउस लगाने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि शुरुआती वर्षों में खेती से लागत के हिसाब से लाभ प्राप्त नहीं हुआ लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
कृषक चतुर्भुज की मेहनत रंग लाई और खीरे की खेती से अच्छा मुनाफा होने लगा। उन्होंने उद्यानिकी विभाग की मदद से एक और पॉलीहाउस व दो शेड नेट हाउस स्थापित किए। उन्होंने बताया कि विभागीय अधिकारियों व विभिन्न योजना की सहायता राशि से चार एकड़ जमीन पर तीन पॉलीहाउस व दो शेडनेट हाउस से साल में दो फसलों के जरिए लाखों रुपए की आमदनी की है। उन्होंने बताया कि खीरे बीकानेर के अलावा दिल्ली, चंडीगढ़, लुधियाना, पंजाब इत्यादि क्षेत्रों में विक्रय किए जा रहे हैं।
युवा कृषक से युवा उद्यमी बनने तक के सफर में चतुर्भुज ने पॉलीहाउस के साथ उद्यान विभाग की अन्य संचालित योजनाएं जैसे कि सोलर पंप संयंत्र, सूक्ष्म सिंचाई संयंत्र, वह वर्षा जल संरक्षण इत्यादि को भी अपनाया।
राष्ट्रीय कृषि विकास योजनान्तर्गत 50 से 70 प्रतिशत तक का अनुदान देय
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत संरक्षित खेती कार्यक्रम के तहत पॉलीहाउस स्थापना पर उद्यान विभाग द्वारा सामान्य किसान को 50 प्रतिशत, अनुसूचित जाति किसानों को 70 प्रतिशत व अनुसूचित जनजाति लघु व सीमांत कृषकों को 95 प्रतिशत अनुदान दिए जाने का प्रावधान है।
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