हिंदी-राजस्थानी के रचनाकार सुनील गज्जाणी की लघुकथा “वारिस” पुरस्कृत

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बीकानेर , 3 अप्रैल। अखिल भारतीय शब्द निष्ठा लघुकथा प्रतियोगिता के अंतर्गत आयोजित ग्यारहवीं राष्ट्रीय लघुकथा प्रतियोगिता में गज्जाणी की लघुकथा को श्रेष्ठ लघुकथा वर्ग में “वारिस” का चयन किया गया। गज्जाणी इससे पूर्व भी अनेक राष्ट्रीय गद्य -पद्य विधा के अंतर्गत हिंदी-राजस्थानी लेखन प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत होते रहे हैं | श्रेष्ठ लघुकथा “वारिस” की विवेचना करते हुए डॉ. श्री अखिलेश पालरिया ने कहा कि – वारिस (सुन सम्भवतः बेटी के भावी ससुराल में पिता ‘मैं’ न रहकर बेटी का पिता हो जाता है जहां चार भाइयों के बँटवारे में आए हवेली के कमरों ने नया लुक ले लिया है लेकिन देहरी-आंगन वैसे ही टूटे-फूटे हैं। यह कथानक का मर्म स्थल है। प्रश्न है कि भाइयों के बीच बँटे हवेली के कमरों का रंग-रोगन हो गया, लेकिन आखिर देहरी-आँगन ही क्यों छूटे, इनका वारिस कौन?
यहां लड़की के पिता का मैं, और बेटी के भविष्य के प्रति सजगता दोनों जाग उठते हैं। जिस घर के लोगों में अपने घर के देहरी-आँगन (घर की प्रतिष्ठा) के प्रति लगाव, झुकाव, सम्मान न हो, आपस में बिखराव-अलगाव हो, वहां बेटी को ब्याहना क्या निरापद होगा?
लघुकथा के निर्णायक क्रमश: थे |
मुख्य निर्णायक- 1.श्रीमती सुनीता मिश्रा, भोपाल
सह-निर्णायक-1.श्रीमती अनूप कटारिया, जयपुर 2.श्रीमती आशा शर्मा ‘अंशु’, जयपुर व 3. सतीश व्यास ‘आस’, भीलवाड़ा थे।

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गौरतलब रहे की पंडित जवाहर लाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी, जयपुर के अतिरिक्त अनेक पुरस्कार-सम्मान तथा विद्या वाचस्पति सहित अनेक मानद उपाधियों से अलंकृत तथा अनेक भाषाओं के रचनाओं का अनुवाद होने के साथ-साथ गज्जाणी की अब तक पांच पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं तथा बाल नाटक पाठ्यक्रम में सम्मिलित है |

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