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किसानों तक तकनीकें पहुंचाने  वैज्ञानिकों की भूमिका महत्वपूर्ण-महानिरीक्षक पुलिस

बीकानेर, 16 नवंबर। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित ‘आइएसइइ-नेशनल सेमिनार 2019’ शनिवार को सम्पन्न हुआ। देशभर के प्रसार क्षेत्र के कृषि वैज्ञानिकों ने तीन दिनों में आयोजित छह तकनीकी सत्रों में कृषि से जुड़े मुद्दों पर ‘महामंथन’ किया।
समापन समारोह विश्वविद्यालय के जिमनेजियम हाॅल में हुआ। इसके मुख्य अतिथि पुलिस महानिरीक्षक जोस मोहन थे। उन्होंने कहा कि खेती की नई तकनीकें किसानों तक पहुंचाने में प्रसार क्षेत्र के वैज्ञानिकों की भूमिका सबसे महत्त्वपूर्ण हैं। किसान यह तकनीकें तभी अपनाएंगे, जब उन्हें इनसे अधिक लाभ होगा। उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया के कारण तकनीकी ज्ञान का त्वरित आदान-प्रदान संभव हुआ है। कृषि वैज्ञानिक भी इनका उपयोग करें तथा वीडियो, फोटो अथवा अन्य माध्यमों से तकनीकें किसानों तक पहुंचाएं।
केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान के निदेशक डाॅ. पी. एल. सरोज ने कहा कि किसान, कृषि को व्यवसाय के रूप में अपनाएं। उनकी आय एवं उत्पादन बढ़े, प्रसार क्षेत्र के वैज्ञानिकों के लिए यह बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि आइएसइइ द्वारा सर्वाधिक प्रासंगिक विषय पर सेमिनार आयोजित की गई है। तीनों दिनों तक देश के विविध क्षेत्रों के कृषि वैज्ञानिकों के वैचारिक मंथन के दूरगामी परिणाम सामने आएंगे।
श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर के कुलपति प्रो. जे. एस. संधु ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से कृषि वैज्ञानिक, अनुसंधान क्षेत्र के नवाचारों से रूबरू होते हैं। उन्होंने सेमिनार में प्राप्त अनुभवों को किसानों तक पहुंचाने का आह्वान किया, जिससे उत्पादन बढे़ और आय में इजाफा हो सके।
नाबार्ड के महाप्रबंधक कुलदीप सिंह ने कहा कि आज जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग बड़ी चुनौती है। पानी लगातार कम हो रहा है। ऐसे में कम पानी वाली फसलों के साथ किसानों को समन्वित खेती की ओर बढ़ना पड़ेगा। उन्होंने नाबार्ड की विभिन्न योजनाओं के बारे में बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह ने की। उन्होंने कहा कि ‘बदलते ग्रामीण परिवेश में कृषि विकास के समग्र दृष्टिकोण’ विषयक सेमिनार के लिए 434 शोध पत्र प्राप्त हुए। इसमें बारह से अधिक राज्यों के वैज्ञानिकों ने भाग लिया। उन्होंने इंडियन सोसायटी आॅफ एक्सटेंशन एजुकेशन की विभिन्न गतिविधियों के बारे में बताया तथा कहा कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाना एवं उनकी आय में वृद्धि के प्रयास करना कृषि वैज्ञानिकों की सर्वोच्च प्राथमिकता हो।
इस अवसर पर आइएसइइ अवार्ड, ई-फैलो, बेस्ट पेपर, बेस्ट प्रजेंटेशन, बेस्ट पोस्टर तथा यूथ साइंटिस्ट सहित विभिन्न अवार्ड प्रदान किए गए एवं सेमिनार के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कार्मिकों का सम्मान किया गया। आयोजन सचिव प्रो. राजेश शर्मा ने आभार जताया। इस दौरान आइएसइइ के पूर्व अध्यक्ष डाॅ. बलदेव सिंह, डाॅ. एस. पी. पुरोहित सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न डीन-डायरेक्टर तथा प्रतिभागी मौजूद रहे।