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आचार्य तुलसी की मासिक पुण्यतिथि पर ‘तनाव मुक्त कैसे रहंे’ विषयक संगोष्ठी आयोजित
गंगाशहर।
तनाव को सदैव बुरा नहीं समझना चाहिए, तनाव अच्छा भी होता है। क्योंकि तनाव होने पर अपने आप को पहचानने का मौका मिलता है। अपने आप का चिंतन कर जीवन की परेशानियों को दूर कर आगे बढ़ने का मौका मिलता है। इसलिए तनाव बुराई नहीं होती, अच्छा भी होता है। यह विचार आचार्य तुलसी की मासिक पुण्यतिथि पर ‘कैसे रहेें तनाव से मुक्त’ विषयक संगोष्ठी की मुख्य वक्ता साहित्यकार डॉ. रेणुका व्यास ‘नीलम’ ने कही। उन्होंने कहा कि अगर हमें जीवन में सटीक निशाना लगाना होता है तो तनाव जरूरी है। परीक्षा में तनाव को भी ले, लेकिन एक सीमा तक ही। एक सीमा तक तनाव अच्छा है परन्तु अगर सीमा से बाहर चला गया तो अच्छा नहीं होगा। इससे आप हर परीक्षा के बेहतर परिणाम पा सकेंगे। उन्होंने कहा कि नकारात्मक तनाव हमारी क्षमता को प्रभावित करता है उससे मुक्त होने की आवश्यकता होती है। तनाव से एकाग्रता बढ़ती है। अत्याधुनिक जीवन शैली यदि हमें व हमारे बच्चों को तनाव की ओर धकेल रही है तो समझना चाहिए कि यहां सुधार की जरूरत है, तनाव के कारणों को जानने की जरूरी है। डॉ. व्यास ने कहा कि आधुनिक जीवन शैली तनाव का प्रसाद है। भटकी हुई दूषित विचारधारा शैली भी तनाव का एक कारण है। हम काम के लिए जी रहे हैं। इसी के चलते आज विश्राम के पल कम होते जा रहे हैं। विश्राम से मन और दिमाग भी प्रसन्नता से भर जाता है। मनोरंजन रिलेक्स का साधन नहीं होता है। जीवन में उत्साह होना जरूरी है। जीवन को आनन्द व खुशी के साथ जिएं। उन्होंने कहा कि बच्चों में अहंकार भी तनाव का मुख्य कारण होता है। अपने अनुसार सभी को चलाने का प्रयत्न करने से तनाव बढ़ने का कारण हो सकता है। आप अपनी बात को रख सकते हैं लेकिन किसी पर थोपना सही नहीं होगा। जहां जरूरी हो वहां अनुशासन करने का प्रयास कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों को दूसरों जैसे बनने का दबाव न डालें। उसकी विशेषताओं को पहचानने का प्रयास करें और उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा दें। किसी से ईर्ष्या करना भी तनाव का प्रमुख कारण हो सकता है। डॉ. व्यास ने कहा कि या तो हम अतीत में जीते है या भविष्य में जीते है लेकिन वर्तमान में नहीं जी पाते। वर्तमान में जीने का प्रयास करना चाहिए। वर्तमान में जीना अच्छा होता है। अगर वर्तमान अच्छा तो भविष्य भी अच्छा होगा। ऐसा करने से तनाव आएगा ही नहीं। उन्होंने बच्चों को पर्यावरण से जोड़ने की प्रेरणा देते हुए कहा कि बच्चों को एक कला अवश्य सीखाएं। कला से वो हमेशा तनाव से मुक्त हो सकते हैं।