शरद पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर नागरी भण्डार की छत पर कवि सम्मेलन-मुशायरा हुआ

शरद पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर नागरी भण्डार की छत पर कवि सम्मेलन-मुशायरा हुआ। धवल चांदनी रात में कविता पाठ से श्रोता हुआ आनंदित।
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धवल चांदनी रात में कविता पाठ से श्रोता हुआ आनंदित

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बीकानेर, 28 अक्टूबर। श्री जुबिली नागरी भण्डार पाठक मंच एवं फन वर्ल्ड वाटर पार्क नाल के संयुक्त तत्वावधान में हर साल की तरह इस साल भी शरद पूर्णिमा की पूर्व संध्या के अवसर पर श्री जुबिली नागरी भण्डार ट्रस्ट की ऐतिहासिक छत पर शरद पूर्णिमा महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। जिसमें कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन रखा गया । त्रिभाषा कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में बीकानेर के हिंदी, उर्दू एवं राजस्थानी भाषा के कवियों, कवयित्रियों एवं शायरों ने नागरी भण्डार की छत पर अपनी एक से बढ़कर एक कविताएं और गजलें पेश करके समां बांध दिया।।
आयोजन प्रभारी वरिष्ठ कवि कथाकार कमल रंगा एवं शाइर कासिम बीकानेरी ने संयुक्त रूप से बताया कि कि इस बार का शरद पूर्णिमा महोत्सव पहली बार नारी शक्ति पर केंद्रित रखा गया जिसमें अतिथियों के तौर पर महिला रचनाकारों एवं समाज की प्रबुद्ध महिलाओं को आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ समाजसेविका डॉ. प्रभा भार्गव ने कहा कि संस्थाओं ने महिलाओं के सम्मान में बहुत बेहतरीन कार्यक्रम का आयोजन करवाके महिलाओं को जो मान सम्मान दिया वैसा मान सम्मान नारी शक्ति को बहुत कम मिल पाता है। इसके लिए दोनों संस्थाएं बधाई की पात्र हैं। इस अवसर पर डॉ.प्रभा भार्गव ने अपनी नारी शक्ति को आह्वान करती भावप्रद कविता ‘शब्द सत्य’ की इन पंक्तियों से श्रोताओं से भरपूर तारीफें पाई-‘शब्द की उंगली पकड़कर/अर्थ की पगडंडियों पर/चेतना के पंख लेकर/तुम समय को लांघ जाओ।’
मंचस्थ अतिथियों के रूप में वरिष्ठ कवयित्री प्रमिला गंगल, वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती सरोज भाटी, वरिष्ठ कवयित्री इंद्रा व्यास, कॉलेज ऑफ कम्युनिटी साइंस की डीन प्रोफेसर विमला डुकवाल, उर्दू व्याख्याता डॉ. शकीला बानो एवं वरिष्ठ कवयित्री डॉ. बसंती हर्ष का सान्निध्य रहा।
फन वर्ल्ड वाटर पार्क नाल के व्यवस्थापक नेमचंद गहलोत ने बताया कि सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल शरद पूर्णिमा महोत्सव पर श्री जुबिली नागरी भण्डार की ऐतिहासिक छत पर तीन भाषाओं के कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में नगर के तीन भाषाओं के तीन पीढ़ियों के कवियों एवं शायरों की उम्दा रचनाओं की प्रस्तुति से ख़ूब रंग जमा। वरिष्ठ कवि कथाकार कमल रंगा ने जहां राजस्थानी कविता की दमदार प्रस्तुति से श्रोताओं की भरपूर तालियां बटोरी वहीं शायर जाकिर अदीब, बुनियाद जहीन और क़ासिम बीकानेरी के साथ इरशाद अजीज के शेरों पर श्रोताओं ने ख़ूब दाद दी। समाजसेवी कवि नेमचंद गहलोत ने नारी के समान पर-’घर आंगन को स्वर्ग बनाओ नारी के समान से’ कविता पेश करके नारी शक्ति को नमन किया। कवि सम्मेलन एवं मुशायरे की शुरुआत मां शारदे की वंदना से वरिष्ठ कवयित्री शारदा भारद्वाज ने किया।

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काव्य की ऐसी त्रिवेणी रसधार बही कि श्रोता आनंद के सागर में गोते लगाते रहे। कवि सम्मेलन एवं मुशायरा में नगर के लगभग चार दर्जन से अधिक रचनाकारों ने अपनी उम्दा कविताएं प्रस्तुत की जिनमें वरिष्ठ कवि प्रमोद कुमार शर्मा, संजय पुरोहित, संजय सांखला, गिरिराज पारीक, राजेंद्र जोशी, गौरीशंकर प्रजापत, शंकर सिंह राजपुरोहित, माहिर बीकानेरी, जुगल किशोर पुरोहित, शमीम अहमद शमीम, डॉ.जियाउल हसन क़ादरी, मधुरिमा सिंह, कृष्णा वर्मा, डॉ. जगदीश दान बारहठ, शेख लियाकत अली ‘लियाकत’, इमदादुल्लाह बासित, अमित गोस्वामी, असद अली असद, मोहम्मद मोइनुद्दीन मुईन, कैलाश टाक, राजाराम स्वर्णकार,बाबूलाल बमचकरी सागर सिद्दीक़ी, शिव दाधीच, गोपाल पुरोहित, व्यास योगेश राजस्थानी एवं आनंद मस्ताना ने काव्य पाठ करके कवि सम्मेलन एवं मुशायरा को परवान चढ़ाया।
इस अवसर पर नगर के अनेक प्रबुद्ध जन मौजूद थे जिनमें नागरी भण्डार के व्यवस्थापक नंदकिशोर सोलंकी, वरिष्ठ साहित्यकार मधु आचार्य आशावादी, डॉ. एस. एन. भाटी, व्यंग्यकार आत्माराम भाटी, डॉ.अजय जोशी डॉ.मोहम्मद फारूक चौहान, मोतीलाल हर्ष, जेपी व्यास, पूर्व पार्षद नरेंद्र सोलंकी, देवदत्त शर्मा, मोहम्मद इस्हाक़ गौरी उफक़ माजिद खान गौरी, गोपाल गौतम महाराज, छगन सिंह, युवा चित्रकार शेख उस्मान हारुन, सैयद हसन अली, अब्दुल शकूर सिसोदिया, पूर्णिमा मित्रा,शिवशंकर शर्मा, गुलफाम हुसैन आही अब्दुल जब्बार जज़्बी सहित अनेक प्रबुद्धजन मौजूद थे। कवि सम्मेलन एवं मुशायरा में प्रसाद भी रखा गया ।
सभी मंचस्थ अतिथियों एवं संचालकों को दोनों संस्थाओं की तरफ से सम्मान पत्र भेंट किए गए। कवि सम्मेलन एवं मुशायरा के प्रारंभ में तमाम आगंतुकों का स्वागत कवयित्री मोनिका गौड़ ने किया। कार्यक्रम का सरस संचालन कवयित्री मनीषा आर्य सोनी एवं डॉ.रेणुका व्यास नीलम संयुक्त रूप से किया।

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