व्यक्ति संयमपूर्ण जीवन जिए- मुनिश्री कमल कुमार


गंगाशहर, 02 अप्रैल। उग्रविहारी तपोमूर्ति मुनिश्री कमल कुमार जी ने कहा कि व्यक्ति को व्यसन मुक्त जीवन जीना चाहिए। जो व्यक्ति निर्व्यसनी होता है, उसका जीवन निरोगी रहता है और वह विभिन्न बीमारियों से बचा रहता है। आजकल आडंबर और प्रदर्शन के कारण शराब एवं अन्य नशीले पदार्थों का उपयोग बढ़ रहा है, जो जीवन के लिए घातक होने के साथ-साथ आध्यात्मिक रूप से भी अनुचित है।



उन्होंने स्नेह भोज और विभिन्न समारोहों में परोसे जाने वाले भोजन में झूठा न डालने पर जोर देते हुए कहा कि झूठा डालने से अहिंसा का संकल्प टूटता है। मुनिश्री ने कहा कि मन को संयमित रखना चाहिए, क्योंकि संयम ही जीवन का मूल आधार है। उन्होंने तप के महत्व पर प्रकाश डालते हुए दीपंकर छाजेड़ कीअठाई तप की अनुमोदना की तथा कहा कि हर व्यक्ति को अपने सामर्थ्य के अनुसार तपस्या करते रहना चाहिए।


मुनिश्री कमल कुमार जी आज दोपहर छाजेड़ निवास में प्रवचन दे रहे थे। खचाखच भरे परिसर में अनेक लोगों ने पहली बार मुनिश्री का प्रवचन सुना। उपस्थित श्रावक समाज ने सामयिक का भरपूर लाभ उठाया।

उन्होंने अहिंसामयी जीवन जीने की प्रेरणा देते हुए बताया कि जीवों की पांच जातियां होती हैं। एकेन्द्रिय से पंचेन्द्रिय तक सभी जीवों में मनुष्य पंचेन्द्रिय जीव है। हमें सावधानीपूर्वक चलना चाहिए ताकि छोटे-छोटे जीव, जैसे कि चींटियां आदि को अनजाने में भी हानि न पहुंचे।
इस अवसर पर मुनिश्री श्रेयांश कुमार जी ने गीतिका और कविता के माध्यम से जीवन को बदलने की प्रेरणा दी। प्रवचन में छाजेड़ परिवार के साथ-साथ कैलाश सोनी, शंकर सोनी, राजू सोनी एवं सोनी परिवार की महिलाएं भी उपस्थित रहीं।मांगीलाल छाजेड़ की तरफ से प्राप्य कृतज्ञता पत्र का वाचन जैन लूणकरण छाजेड़ ने करके आभार व्यक्त किया।
