विकट परिस्थिती में भी रहे सम : मुनि हिमांशुकुमार

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  • मेनेज यॉर लाइफ कार्यशाला का आयोजन गुरुवार को

चेन्नई, 28 अगस्त। आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि श्री हिमांशुकुमारजी ने तेरापंथ सभा भवन में मुक्ति का राजपथ प्रवचनमाला के अन्तर्गत धर्मपरिषद् को सम्बोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति को 24 घण्टे सामायिक में रहना चाहिए। उसके लिए उसे मन से प्रतिकार, वचन से प्रतिवाद और काया से प्रतिक्रिया से बचने का प्रयास करना चाहिए।

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विकट परिस्थितियों में भी सामने वाले की स्थिति के कारणों की खोज करके ही जवाब देना चाहिए। सामने वाला गुस्सा करे, अपमान करे या शरीर में भी दु:ख-पीड़ा उत्पन्न हो, तो यह चिन्तन करें कि मेरे ही पूर्वकृत अशुभ कर्म फल दे रहे है, मेरा बंधा हुआ एक अशुभ कर्म कम हो रहा है। प्रसन्न भाव से प्रतिक्रिया विरत रहते हुए शुभ भावों में रमण करें। मुनिप्रवर ने अनुप्रेक्षा के प्रयोग की जानकारी देते हुए हर क्षण सामायिक में रहने की प्रेरणा दी।

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मुनि श्री हेमंतकुमार जी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की पहचान उसकी एक प्रवृत्ति को देख कर नहीं की जा सकती और उसकी एक आदत को देखकर धारणा भी न बनायें। अर्हत् वाणी के अनुसार मति के चार भेदों की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि धारणा बनाने से पूर्व सम्बंधित विषय का अभ्यास और उसकी विस्तृत जानकारी के साथ, तथ्य का सही निर्णय होना आवश्यक है।

90 वर्ष की अवस्था में तपस्यारत श्रद्धानिष्ट श्रावक जयचन्दलाल पुगलिया ने 20 दिनों के उपवास का मुनिश्री से प्रत्याख्यान किया। गुरुवार दोपहर 2 बजे से तेरापंथ महिला मण्डल के तत्वावधान में 45 वर्ष तक की महिलाओं के लिए लाइफ चेंजिंग वर्कशॉप- मेनेज यॉर लाइफ का आयोजन होगा। जिसमें जीवन निर्माण के सरल सूत्रों की चर्चा करते हुए प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जायेगा।

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