सरगम के रंग पवन प्यारे के संग ने स्वर संगीत को रचाया

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बीकानेर 26 नवम्बर। साहित्य एवं संगीत की जुगलबंदी का कार्यक्रम ‘सरगम के रंग पवन प्यारे के संग’ कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्कृतिकर्मी राजेन्द्र जोशी ने कहा कि साहित्य एवं संगीत का चोली-दामन का साथ युगों-युगों से चलता आया है। आज के इस भव्य कार्यक्रम में एक से बढकर एक अच्छे सुमधुर कंठों से गीतों की प्रस्तुति हुई चाहे वह फिमेल हो या मेल आवाज।

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मुख्य अतिथि गीतकार मनीषा आर्य सोनी ने कहा कि मुझे गर्व है कि मेरा जन्म श्री ब्राहमण स्वर्णकार कुल में हुआ, जहां से संगीत मुझे विरासत में मिला। मेरी दादी एवं नानी पारम्परिक लोक भजन गाया करती थी और बचपन में मैं भी उनके साथ गुनगुनाया करती थी। आज तीन घंटे चले संगीत के इस भव्य आयोजन में मैंने पाया कि सभी कलाकार सिद्धहस्त थे जिन्होंने अपनी गायन कला का शानदार प्रदर्शन कर सभी को भावविभोर कर दिया।

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कार्यक्रम की शुरुआत में सभी अतिथियों ने मां शारदे के चित्र पर पुष्पांजली की। स्वागत उद्बोधन देते हुए व्यंग्यकार-सम्पादक डॉ.अजय जोशी ने संगीत के कार्यक्रम की महत्ता पर विचार रखते हुए सभी का स्वागत किया। युवा कवयित्री एवं गायिका ज्योति वधवा ‘रंजना’ ने सैंया ले गयी जिया तेरी पहली नजर, याद मेरी होटों पे आती तो होगी गीतों से कार्यक्रम का आगाज किया। पवन प्यारे एवं गोपिका सोनी ने साथ में गीत गाया – हम दोनों दो प्रेमी दुनिया छोड़ चले, ये आँखें देखकर हम सारी दुनिया भूल जाते हैं। पवन प्यारे और निहारिका गर्ग ने – क्या यही प्यार है, परदेसिया ये सच है पिया, कार्यक्रम का शानदार संचालन करते हुए हास्य-व्यंग्य कवि बाबू बमचकरी ने काव्यमयी पंक्तियों से गायक कलाकारों को मंच पर आमंत्रित कर संचालन विधा को उंचाइयां प्रदान की।

शब्दरंग साहित्य एवं कला संस्थान के सचिव कवि-कथाकार राजाराम स्वर्णकार ने संस्थान द्वारा आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों की विस्तार से व्याख्या करते हुए स्वर-संगीत को एक दूसरे का पूरक बताया। शब्दरंग द्वारा सम्मान में रंगकर्मी बी.एल.नवीन, श्रीगोपाल स्वर्णकार, डॉ.नासिर जैदी, भवानीशंकर, इन्द्रजीत कौशिक ने युवा गायक पवन सोनी का शोल, अभिनन्दन पत्र, स्मृति चिह्न, जयमाला, श्रीफल, अपर्णा अर्पित कर बहुमान किया गया। अभिनंदन पत्र का वाचन पत्रकार डॉ.नासिर जैदी ने किया। पवन सोनी का सम्मान माल्यार्पण एवं शोल भेंटकर श्री ब्राहमण स्वर्णकार पेंसनर्श सोसायटी से प्रेमप्रकाश, केसरीचंद, ब्रजगोपाल, सुन्दरलाल, शंकरलाल कट्टा, रामस्वरूप सोनी ने किया।

प्रेरणा प्रतिष्ठान से सम्मान प्रेमनारायण व्यास एवं नवकिरण सृजन मंच से अभिनन्दन डॉ.अजय जोशी ने किया। अभिनन्दन समारोह के बाद वापस संगीत में लौटते हुए पवन प्यारे और हैप्पीसिंह ने – इमली का बूटा बेरी का पेड़ और सलामत रहे दोस्ताना हमारा, हैप्पीसिंह और गोपिका सोनी ने -देखो मैंने देखा है ये इक सपना सुनाकर दाद लूटी।

अशोककुमार सोनी ने – हाल क्या है दिलों का ना पूछो सनम गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। हैप्पीसिंह ने – नायक नहीं खलनायक हूँ मै और बार बार दिन ये आए, मनीषा आर्य सोनी ने – सारंगा तेरी याद में, राधाकिसन भजूड़ ने – ये तेरी सादगी ये तेरा बांकपन सुनाकर कार्यक्रम को उंचाइयां प्रदान की। कार्यक्रम में कवयित्री मीनाक्षी स्वर्णकार, भावना स्वर्णकार, विजयश्री सोनी, चंचल सोनी, सुधा, मधु, उमंग, हर्षिता, सुरेन्द्र सोनी, वीणा ओझा ने भी अपने विचार रखे। सभी कलाकारों ने संगीतमयी केक काटकर कार्यक्रम का भरपूर आनन्द लिया।

 

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