उदयरामसर दादाबाड़ी के मंदिर में, ध्वजारोहण, दादागुरुदेव व स्नात्र पूजा

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बीकानेर, 26 दिसम्बर। उदयरामसर की करीब 350 वर्ष अधिक पुरानी प्रथम दादा गुरु जिनदत्त सूरिश्वरजी की दादाबाड़ी के जैन तीर्थंकर भगवान वासुपुज्य स्वामी के मंदिर में मंगलवार पूर्णिमा को सालाना ध्वजारोहण समारोह, दादा गुरुदेव इकतीसा का पाठ चैत्यवंदन, शांति कलश व स्नात्र पूजा का आयोजन हुआ।

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वरिष्ठ श्रावक भीखमचंद नाहटा परिवार की ओर से अहमदाबाद से मंगवाई गई लाल रंग की सवा नौ फीट की पंच कल्याणक मांगलिक चिन्हों से सुशोभित ध्वज का नवकार महामंत्र व जैन आगमों के मंत्रों से शुद्धिकरण कर स्थापित किया गया। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ से सम्बद्ध ज्ञान वाटिका के बच्चों ने प्रभारी सुनीता नाहटा, रविवारीय जिनालय स्नात्र पूजा के समन्वयक ज्ञानजी सेठिया व पवन खजांची के नेतृत्व मेंं बच्चों ने ’’लहर-लहर लहराए केसरिया झंडा जिनालय का ’’ आदि भजनों को गाते हुए स्थापित करवाया।

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ज्ञान वाटिका के बच्चों ने भगवान वासुपुज्य स्वामी, दादा गुरुदेव जिनदत्त सूरि की सविधि पूजा करवाई तथा स्नात्र पूजा में सभी 24 तीर्थंकरों का जन्म कल्याणक मनाते हुए भजन व स्तुतियों से उनकी वंदना की। पूजा व ध्वजारोहण समारोह में धर्मनिष्ठ श्रावक भीखमचंद नाहटा परिवार के प्रेम चंद -ममता देवी, श्रीपाल-श्रीमती शशि नाहटा, अरिहंत, महावीर, संजय नाहटा, मुकेश व राजश्री छाजेड़़ ने ध्वजवंदन, ध्वजपूजन व स्नात्र पूजा करवाई।
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