गच्छाधिपति जैनाचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वरजी नोखा के लिए विहार संक्रांति 13 को

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बीकानेर, 11 फरवरी। जैन श्वेताम्बर तपागछ के श्री विजय वल्लभ सूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति जैनाचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वरजी अपने सहवृति मुनि व साध्वीवृंद के साथ रविवादो मंदिरों गंगाशहर की मिनी मांडोली व बैदों के महावीरजी के मंदिर में जिन बिम्बों की प्रतिष्ठा करवाकर विहार कर गए । वे रात्रि विश्राम पलाना के सिपानी परिवार के अनेकांत विहार में करेंगे।

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गच्छाधिपति गंगाशहर भीनासर के अनेक मंदिरों में दर्शन वंदन किए तथा अनेक श्रावक-श्राविकाओं के निवास पर जाकर आशीर्वाद दिया। वे 13 फरवरी को नोखा पहुंचकर संक्रांति महोत्सव में महा मांगलिक सुनाएंगे। संक्रांति का लाभ गोविंद राम जी मरोठी परिवार ने लिया है।

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आयोजन से जुड़े विनोद मरोठी ने बताया महामंगलकारी संक्रांति समारोह से पूर्व सुबह साढ़े नौ बजे जैन मंदिर में पहुंचेंगे तथा सुबह दस बजे मरोठी परिसर के गोविंद निवास में महामंगलकारी संक्रंति समारोह में मंगल वाठ सुनाएंगे। दोपहर एक बजे सकल श्रीसंघ का स्वामी वात्सल्य का आयोजन रखा गया है।

बीकानेर के भी अनेक श्रावक-श्राविकाएं नोखा में होने वाले संक्रांति महोत्सव में हिस्सा लेंगे। उनके लिए श्री आत्मानंद जैन सभा व अनेक धर्मनिष्ठ श्रावकों की ओर से पुरानी जेल रोड से सुबह आठ बजे बसों की व्यवस्था की है।

नित्यानंद जी का चातुर्मास पालीताणा मेें

बीकानेर 11 फरवरी। वल्लभ सूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति जैनाचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वरजी का वर्ष 2024 का चातुर्मास गुजरात के सुप्रसिद्ध पालीतणा तीर्थ में होगा। श्री आत्मानंद जैन सभा बीकानेर ने अध्यक्ष चन्द्र बाबू कोचर व मंत्री लीलम चंद सिपानी और अन्य पदाधिकारियों, बीकानेर के तपागच्छ संघ के अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने बीकानेर से पालीतणा तक विशेष रेलगाड़ी से पहुंचने तथा चातुर्मास के दौरान तन, मन व धन से सहयोग करने का संकल्प दोहराया।

बीकानेर में पुष्पेन्द्र विजय व मुनिश्री श्रुतानंद विजय चातुर्मास

बीकानेर, 11 फरवरी। जैन श्वेताम्बर तपागछ के श्री विजय वल्लभ सूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति जैनाचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वरजी के शिष्य मुनिश्री श्रुतानंद विजय व पुष्पेन्द्र विजय का 2024 का चातुर्मास बीकानेर में होगा। चातुर्मास की घोषणा रविवार को श्रावक-श्राविकाओं की भावना को देखते हुए गच्छाधिपति ने धर्म सभा में की ।

मुनि पुष्पेन्द्र विजय मूल रूप से रायसिंजपुरा बड़ौदा, गुजरात के निवासी है तथा उन्होंने 15 वर्ष पूर्व हस्तिनापुर तीर्थ में गुरु जैन संत राजेन्द्र विजय की प्रेरणा से दीक्षा ग्रहण की थी। उनका सांसारिक नाम प्रफुल्ल कुमार था। उनकी सांसारिक पिता का नाम रमेश भाई तथा माताजी का नाम केंगली देवी है।

पहली बार बीकानेर आएं मुनि श्रुतानंद महाराज मूलरूप् से भावनगर, गुजरात के है तथा इन्हांंने 13 वर्ष पूर्व विजय नित्यानंद सूरीश्वरजी से बलदगांव गुजरात में दीक्षा ग्रहण की। इनके सांसारिक माता का नाम श्रीमती शोभना व पिता का नाम जसवंत भाई है। बीकानेर में चातुर्मास करने वाले दोनों मुनियो ंने 22 हजार से अधिक किलोमीटर की यात्रा कर भगवान महावीर के सिद्धान्तों को जन-जन तक पहुंचाते हुए देव, गुरु व धर्म की प्रभावना करने में लगे है।

गुरु वल्लभ शांति जैन भवन का लोकार्पण

बीकानेर, 11 फरवरी। जैन श्वेताम्बर तपागछ के श्री विजय वल्लभ सूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति जैनाचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वरजी व सहवृति मुनियों ने रविवार को गंगाशहर में कुम्हारों के मोड़ पर योगीराज शांति गुरुदेव के मंदिर मिनी मांडोली से करीब 100 मीटर दूरी पर स्थित गुरु वल्लभ शांति जैन भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर जैन श्वेताम्बर तपागच्छ के वरिष्ठ श्रावक व मिनी मांडोली का निर्माण का लाभ लेने वाले श्री रिद्धकरण,सूरजदेवी सिपानी चेरिटेबल ट्रस्ट व श्री हनुमानदास, पन्नालाल सिपानी परिवार के लीलम सिपानी, श्रीमती शांति देवी सिपानी, सरोज सिपानी सहित अनेक धर्मनिष्ठ श्रावक-श्राविकाएं व सिपानी परिवार के सदस्य मौजूद थे।

आयोजन से जुड़े लीलम सिपानी ने बताया कि मिनी मांडोली में पूजा व दर्शन करने वाले भक्त गुरु वल्लभ शांति जैन भवन मेंं प्रवास कर सकेंगे तथा पूजा के वस्त्र आदि बदल सकेंगे। उनके लिए सुविधायुक्त कमरों आदि का निर्माण किया गया है।

मिनी मांडोली के आगे धर्म सभा

बीकानेर, 11 फरवरी। गच्छाधिपति जैनाचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वरजी के सान्निध्य में गंगाशहर में कुम्हारों के मोड के पास बने योगीराज शांति गुरुदेव के मंदिर मिनी मांडोली के आगे रविवार को धर्म सभा आयोजित की गई। धर्म सभा में मंदिर का निर्माण करवाने वाले श्री रिद्धकरण, सूरजदेवी सिपानी चेरिटेबल ट्रस्ट व श्री हनुमानदास, पन्नालाल सिपानी परिवार के लीलम सिपानी, श्रीमती शांति देवी सिपानी के सदस्यों, मंदिर निर्माण करने वाले वास्तुशिल्पियों व कारीगरों का अभिनंदन किया गया है।

श्री आत्मानंद जैन महासभा के अध्यक्ष चन्द्र बाबू कोचर, सिपानी परिवार व सूरत, दिल्ली व पंजाब से आए श्रावकों ने गच्छाधिपति को कम्बली और लीलम सिपानी को शॉल ओढ़ाकर तथा मंदिर का निर्माण करने वालों के परिजनों, मंदिर के प्रमुख चलवा पिंडवाड़ा के नारायण लाल प्रजापति, कन्हैया लाल सोमपुरा, दिलीप प्रजापत, निर्माण कार्य का सुपरविजन करने वाले गौतम व मनीष सिपानी आदि का अभिनंदन किया। गच्छाधिपति नित्यानंद सूरीश्वरजी ने बीकानेर में अनेक मंदिर व सूरज भवन का निर्माण करवाने वाले धर्मनिष्ठ श्रावक हनुमानदास व पन्नालाल सिपानी का भी स्मरण दिलाया तथा महामांगलिक पाठ के माध्यम से सबके मंगलमय जीवन की कामना की।

साध्वीश्री पूर्ण प्रज्ञा का अभिनंदन

बीकानेर में तीन चातुर्मास कर चुकी साध्वीश्री पूर्णप्रज्ञा का मिनी मांडोली की धर्म सभा में शांति देवी सिपानी, श्रीमती सरोज देवी, कुसुम, रश्मि सिपानी, सपना सुधीर सुराणा, मांगी देवी, उर्मिला, लीला व सरिता देवी सिपानी ने कम्बली ओढ़ाकर सम्मान किया। बैदों के महावीरजी के मंदिर में भी साध्वीश्री को बैद, सोनावत व भांडावत परिवार की श्राविकाओं ने कमंबली ओढ़ाकर वंदन, अभिनंदन किया। श्रीमती शांति देवी पत्नी स्वर्गीय पन्नालाल सिपानी परिवार की ओर से चन्द्रकला-राजेश गोलछा, प्रमिला नरपत खजांची, सरोज-जसवंत खजांची, मधु-वीरेन्द्र बोथरा, विजय लक्ष्मी सिद्धार्थ मुकीम ने गच्छाधिपति व साध्वीवृंद का वंदन अभिनंदन किया ।

द्वार का उद्घाटन व पूजा आज

गंगाशहर में योगीराज शांति गुरुदेव के सफेद संगमरमर से बने मंदिर मिनी मांडोली (जालौर के मांडोली) की हूबहू प्रतिकृति में सोमवार को सुबह शुभ मुर्हूत में द्वार का उद्घाटन होगा तथा उसके बाद शांतिगुरुदेव पूजा की जाएगी। रविवार को सुबह मंगल प्रतिष्ठा के बाद शांति गुरुदेव की तीन प्रतिमाओं, देवी सरस्वती, देवी पद्मावती और शांति गुरुदेव व उनके गुरुओं के पगलियों की भक्ति के साथ पूजा की गई। मंदिर में ध्वज स्थापित किया गया। मंदिर में सविधि पूजा अहमदाबाद से आए कल्पेश भाई करवा रहे हैं।

भजन संध्या
गंगाशहर की मिनी मांडोली के पास शनिवार रात को भक्ति संगीत संध्या आयोजित की गई। आयोजन से जुड़े लीलम सिपानी ने बताया कि महेन्द्र कोचर व पिन्टू स्वामी ने विभिन्न राग व तर्जों पर आधारित भजन प्रस्तुत कर श्रोताओं को करतल ध्वनि के साथ नृत्य करने और योगीराज गुरुदेव के जयकरों के लिए मजबूर कर दिया।

बैदों के महावीर जी के मंदिर में एक नई व 12 प्राचीन प्रतिमाओं की पुर्न स्थापना

बीकानेर, 11 फरवरी । बैदों के महावीरजी के छह शताब्दी से अधिक प्राचीन भगवान महावीर स्वामी के मंदिर में रविवार को गच्छाधिपति जैनाचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वरजी उनके आज्ञानुवर्ती मुनि व साध्वीवृंद, श्रावक-श्राविकाओं के चतुर्विद संघ की साक्षी में चक्रेश्वरी माता की नई तथा भगवान शंखेश्वर पार्श्वनाथ सहित 12 अति प्राचीन जिन बिम्बों की पुर्न उत्थापन जैन विधि विधान से किया गया।

गच्छाधिपति जैनाचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वरजी ने कहा कि देव,गुरु व धर्म के प्रति निष्ठा व समर्पण भाव रखते हुए बीकानेर के इस अति प्राचीन मंदिर के विकास में सहभागी बनें तथा नियमित मंदिर में चैत्यवंदन करने को अपनी दिन चर्या में शामिल करें। गच्छाधिपति के आव्हान पर अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने मंदिर के विकास में सहयोग का संकल्प दोहराया ।

इस अवसर पर श्री जैन श्वेताम्बर महावीर स्वामीजी का मंदिर ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष राजेन्द्र बैद व मंत्री भूपेन्द्र बैद, सोनावत व भांडावत जैन परिवारों के वरिष्ठ श्रावकों ने गच्छाधिपति नित्यानंद सूरीश्वरजी का कम्बली ओढ़ाकर अभिनंदन किया। उन्होंने मंदिर के निर्माण में सहयोग करने वाले कन्हैयालाल सोमपुरा, सहित अनेक श्रावकों का मंदिर के जीर्णोंद्धार कार्य में सहयोग करने पर अभिनंदन करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

 

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