गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन को लेकर आयोजित सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

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गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन की जानकारी सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करें लेकिन निजी जानकारी नहीं- श्रीमती तेजस्विनी गौतम, एसपी

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बीकानेर, 14 मार्च। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय में गुरुवार को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन तकनीक को लेकर सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। मानव संसाधन निदेशालय में आयोजित शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एसपी श्रीमती तेजस्विनी गौतम ने कहा कि गुणवत्ता पूर्ण बीज उत्पादन की पूरी जानकारी आप सब प्रतिभागी सोशल मीडिया पर खूब शेयर करें ताकि किसानों को इसका भरपूर लाभ मिले। लेकिन खुद की निजी जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर करने से हमेशा बचें।

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एसपी ने कहा कि साइबर क्राइम के लिए लालच और लापरवाही के चलते 99 फीसदी हम खुद जिम्मेदार होते हैं। आज हर कोई सोशल मीडिया अकाउंट खोलने और सारी जानकारी उस पर डालने के लिए आतुर नजर आता है। इससे साइबर अपराध बढ़ रहे हैं। पुलिस की इमेज को लेकर कहा कि किसी की भी इमेज कहने सुनने से ना बनाकर खुद के एक्सपीरियंस से बनाएं।

राष्ट्रीय बीज परियोजना के अंतर्गत हुए इस कार्यक्रम में कृषि विश्वविद्यालय कुलपति डॉ अरूण कुमार ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में सभी प्रतिभागी गुणवत्ता पूर्ण बीज उत्पादन को अच्छे से सीखें और यहां से सीखने के बाद अन्य लोगों को भी इसकी जानकारी साझा करें। ताकि किसानों को इसका लाभ मिले। कुलपति ने विश्वविद्यालय में पढ़ रही छात्राओं को पुलिस के सहयोग से सात दिवसीय सेल्फ डिफेंस दिलाने की बात भी कही। इससे पूर्व अनुसंधान निदेशक डॉ पीएस शेखावत ने कहा कि किसानों को बीज रिप्लेसमेंट को बढ़ाना होगा तभी उत्पादन बढ़ा सकेंगे।

इससे पूर्व स्वागत भाषण में अतिरिक्त निदेशक बीज डॉ पीसी गुप्ता ने सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को लेकर बताया कि इसमें किसान, विश्वविद्यालय के स्टूडेंट्स समेत जोधपुर, उदयपुर, जोबनेर के अलावा बुंदेलखंड, झांसी से भी प्रतिभागी आए हैं। कुल 75 प्रतिभागी इसमें हिस्सा ले रहे हैं। श्री गुप्ता ने बताया कि कृषि उत्पादन बढ़ाने में बीज ही सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हाइब्रिड बीज के चलते ही हरित क्रांति हुई थी। लेकिन किसान 25 से 30 फीसदी बीज ही रिप्लेसमेंट करता है।

मानव संसाधन विकास निदेशालय के निदेशक डॉ एके शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि कुलपति डॉ अरुण कुमार ने विश्वविद्यालय की सूरत और सीरत दोनों बदल दी हैं। इनके सहयोग से विभिन्न प्रकार के रिसर्च प्रोजेक्ट स्वीकृत हुए हैं। इसका लाभ यहां के स्टूडेंट्स को मिल रहा है। उन्होने कहा कि सीड किसान की आत्मा होती है इसकी गुणवत्ता अच्छी होनी बहुत आवश्यक है।
कार्यक्रम की शुरूआत में अतिथियों का साफा पहना कर और बुके भेंट कर किया गया।

कार्यक्रम में आईएबीएम निदेशक डॉ आईपी सिंह, सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय अधिष्ठाता डॉ विमला डुंकवाल, भू-स्पृश्यता एवं आय सर्जन निदेशक डॉ दाताराम, डॉ सीमा त्यागी, कृषि पर्यवेक्षक श्री आरएस शेखावत समेत बड़ी संख्या में प्रतिभागी उपस्थित रहे।

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