जीवन में लक्ष्य की प्राथमिकता ही सफलता प्राप्ति का मूल मंत्र-डॉ. सी.एस. श्रीमाली

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बीकानेर , 23 दिसम्बर। स्थानीय बिनानी कन्या महाविद्यालय, बीकानेर में आज को राष्ट्रीय सेवा योजना की तीनों इकाइयों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय विषेष शिविर के पांचवें दिन रासेयो का विशेष शिविर माँ शारदे के तेल चित्र पर पुष्प चढ़ाकर किया गया।

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कार्यक्रम के प्रथम चरण में आज के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे बीकानेर जगत के काउंसलर डॉ. चन्द्रशेखर श्रीमाली ने छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि ‘‘जीवन में लक्ष्य की प्राथमिकता ही सफलता प्राप्ति का मूल मंत्र है। विद्यार्थी जीवन में महाविद्यालय स्तर में इसकी आवश्यकता सर्वप्रथम है क्योंकि यही समय जीवन का वह सार्थक मोड़ है जहां से सफलता की मंजिल तय की जाती है।’’

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उन्होंने बताया कि अवसर बदलते वैश्विक स्तर पर हो रहे विज्ञान व तकनीकी स्तरों पर नवाचारों के बीच सार्थक संतुलन बनाना होगा ताकि हमारी युवा शक्ति का रचनात्मक सहयोग समाज व राष्ट्रीय सरोकारों को साधने में मिल सकें। इसी क्रम में डॉ. श्रीमाली ने छात्राओं की अनेक जिज्ञासाओं का निवारण किया।

महाविद्यालय रासेयो प्रभारी डॉ. अनीता मोहे भारद्वाज ने बताया कि महाविद्यालय सभागार में परिचर्चा का आयोजन किया जिसके तहत छात्राओं ने सामाजिक सुरक्षा, नारी सुरक्षा, नारी स्वावलंबन, नारी जीवन के लिए विभिन्न उपयोगी पाठ्यक्रमों तथा उनकी उपयोगिता, तकनीकी शिक्षा में कम्प्यूटर शिक्षा की महत्ता व उनका रोजगारोन्मुखी लाभ तथा विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक समस्याओं के समाधान का सटीक उपाय तथा वर्तमान परिप्रेक्ष्य में महिलाओं के विभिन्न अधिकारों विषय पर छात्राओं ने अपने विचार रखते हुए उनका सार्थक समाधान प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर लोक प्रशासन विषय के प्रवक्ता महेश पुरोहित, प्रबंधन विषय के व्याख्याता रविकान्त व्यास, इतिहास विषय के व्याख्याता मधु सोलंकी व संगीत विषय के व्याख्याता श्रीमती गंगा सोनी ने अपने विचार मंच के माध्यम से स्वयंसेविकाओं से साझा किये।

कार्यक्रम में अगले चरण में रासेयो के प्रभारी मुकेश बोहरा के दिशा निर्देशन में आर्ट एण्ड क्राफ्ट गैलेरी का आयोजन स्वयंसेविकाओं ने किया आर्ट एण्ड क्राफ्ट में स्वयंसेविकाओं के द्वारा बनाये गये विभिन्न आर्ट्स से संबंधित मोमेण्टों का निर्माण अपने हाथों से उन वस्तुओं के साथ निर्मित किया जिनका प्रयोग सामान्य नहीं होता हो। जिसमें उन्होंने विभिन्न विषयों जैसे सामाजिक, सांस्कृतिक तथा शैक्षिक व राष्ट्रीय सरोकारों से जुडे़ पहलुओं को अपनी कला-कौशल से सभी के सामने रखा। इस अवसर पर सभी स्वयंसेविकाओं के साथ महाविद्यालय प्रबंध समिति सचिव ने भी इस प्रदर्शनी को देखकर छात्राओं के हुनूर को खुले मन से सहारा साथ ही उन्होंने छात्राओं को निर्देषित किया कि अगर महाविद्यालय आपके हुनूर को आगे बढ़ाने में सहयोग कर सकता है तो वे सदैव उनके लिए तैयार रहेंगे जितनी हो सके महाविद्यालय उनका सहयोग करने को तैयार है।
रासेयो अधिकारी डॉ. अषोक व्यास ने बताया कि आशुवार्ता तथा तुरन्त अपनी सार्थक प्रस्तुति में सक्षमता के लिए महाविद्यालय मैदान में प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम का आयोजन किया जिसके तहत पात्र में रखी गयी विभिन्न प्रश्नो एवं सिद्धान्तों की पर्चियों को प्रत्येक इकाई की स्वयंसेविकाओं को उठानी थी और उस पर प्र्शन का उत्तर भी देना था साथ ही सिद्धान्त पर अपने व्याख्यान भी देने थे। चयनित पर्ची के आधार पर क्रम से प्रथम इकाई, द्वितीय इकाई एवं तृतीय इकाई की स्वयंसेविकाओं ने बारी-बारी से पर्चियां निकाली और उनके उत्तर दिये प्रत्येक सही उत्तर देने वाली स्वयंसेविकाओं को प्रोत्साहित करने के लिए ईनाम भी उसी समय इकाई प्रभारियों द्वारा दिया गया। अन्त में अधिकतम उत्तर देने वाली इकाई को संयुक्त रूप से विजेता घोषित करना था जिसमें इकाई तृतीय की स्वयंसेविकाऐं सबसे अधिक उत्तर देने वाली इकाई के रूप में चयनित हुई।

कार्यक्रम के अगले चरण में गोद ली गई बस्ती भाटों के बास के दक्षिण क्षेत्र में राजीव नगर में छात्राओं को स्वच्छता अभियान के अन्तर्गत एक समूह में लेकर कार्यक्रम अधिकारी श्री मुकेश बोहरा ने दौरा किया जिसमें वहाँ की छोटी-छोटी गलियों में फैली हुई प्लास्टिक की थैलियों को एकत्रित कर उन्हें जलाया गया। साथ ही मौहल्ले वासियों को मौसम संबंधी बीमारियों से आगाह करते हुए कहा कि सर्दियों के मौसम में शरीर एवं ,खाद्यान का पूर्णतया ध्यान रखें।

महाविद्यालय प्राचार्या डॉ. अरूणा आचार्य ने छात्राओं को शिविरकालीन ज्ञान की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि ‘‘परिवार मे हम और हमारा परिवार केन्द्र में रहता है जबकि शिविर काल में समाज के प्रत्येक क्षेत्र से हमारा सम्पर्क व सक्रिय सहयोग का आधार तैयार होता है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी होने की व्यापक व महान शिक्षा व उसके संस्कार के प्रति प्रतिबद्धता की पूर्ण साधना व उसमें सिद्धि की अवस्था इन्हीं शिविर कालीन साहचर्य में प्राप्त करता है।

शिविर के अन्तिम चरण में छात्राओं के मनोरंजन के लिए अत्याक्षरी कार्यक्रम का आयोजन हुआ जिसका प्रारम्भ वैदिक मंत्रोचार से हुआ जिसमें छात्रा नीधि किराडू ने गुरुः ब्रह्मा, गुरुः विष्णु , गुरुः देवों , गुरुः महेश्वरम से शुरूआत की। बाद में जिसमें अन्तिम अक्षर से छात्राओं को लोकगीत, फिल्मीगीत तथा अनेक प्रसिद्ध विद्धानों, शास्त्रीय कलाकरों तथा महिला शख्सियत के नामों पर अपनी प्रतिभा दिखाई।
कार्यक्रम का संचालन कम्प्यूटर विभागाध्यक्ष रामकुमार व्यास ने किया।

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